जीवन की सुगमता: समावेशी प्रगति की भारत की यात्रा

पाठ्यक्रम : जीएस-3/समावेशी विकास  

सन्दर्भ

  • भारत सरकार ने जीवन की सुगमता में सुधार के लिए किए गए प्रगति कार्यों को रेखांकित किया, जो समावेशी विकास और नागरिकों के बेहतर जीवन-स्तर में योगदान दे रहे हैं।

जीवन की सुगमता क्या है?

  • जीवन की सुगमता से आशय नागरिकों की उस क्षमता से है, जिसके माध्यम से वे बुनियादी सेवाओं, अवसरों, अवसंरचना तथा शासन तक सुविधाजनक, किफायती और सम्मानजनक तरीके से पहुँच प्राप्त कर सकें।
  • इसका उद्देश्य आवास, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, परिवहन, वित्तीय सेवाओं तथा डिजिटल शासन तक पहुँच सुनिश्चित करके दैनिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है।
  • यह समावेशी एवं सतत विकास का एक प्रमुख स्तंभ है।
  • भारत ने आवास, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत, वित्तीय सेवाओं, संपर्क-सुविधा तथा नागरिक-केंद्रित शासन तक पहुँच बढ़ाकर जीवन की सुगमता को सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न पहलें की हैं।

आवास और बुनियादी सुविधाएँ

  • प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी (PMAY-U): भारत ने प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के माध्यम से किफायती आवास तक पहुँच में उल्लेखनीय विस्तार किया है।
  • पीएमएवाई-शहरी के अंतर्गत 1.25 करोड़ से अधिक शहरी आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 98 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं।
  • पीएमएवाई-ग्रामीण के अंतर्गत 3 करोड़ से अधिक ग्रामीण आवासों का निर्माण पूरा किया गया है, जिससे संवेदनशील परिवारों को सुरक्षित आश्रय प्राप्त हुआ है।

आवश्यक सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY), जिसे मई 2016 में प्रारम्भ किया गया था, ने स्वच्छ एलपीजी संयोजनों की उपलब्धता सुनिश्चित कर ग्रामीण रसोई व्यवस्था में परिवर्तन किया।

जल जीवन मिशन (JJM ) ने हर घर जल के लक्ष्य के साथ नल द्वारा जल आपूर्ति के विस्तार में तीव्र प्रगति की है। जून 2026 तक 15.86 करोड़ (81.94 प्रतिशत) से अधिक परिवारों को स्वच्छ नल-जल उपलब्ध हो चुका है।

स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण, जिसे 2014 में प्रारम्भ किया गया था, ने सभी ग्रामीण परिवारों को शौचालय उपलब्ध कराए, जिससे गाँवों में सम्मान और स्वच्छता सुनिश्चित हुई।

स्वच्छ भारत मिशन–शहरी: शहरी अपशिष्ट प्रसंस्करण 2014 के 16 प्रतिशत की तुलना में 2026 में बढ़कर 82 प्रतिशत हो गया।

विश्वसनीय, किफायती और स्वच्छ ऊर्जा 

  • सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण: सौभाग्य योजना के अंतर्गत लगभग 2.86 करोड़ परिवारों को विद्युत संयोजन प्रदान किया गया।
  • नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार: नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2014 के 76 गीगावाट से बढ़कर 2026 में 274 गीगावाट से अधिक हो गई।
  • प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: यह परिवारों को छतों पर सौर ऊर्जा प्रणालियाँ स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करती है। 40 लाख से अधिक परिवार पहले ही रूफटॉप सौर प्रणालियाँ स्थापित कर चुके हैं।

वित्तीय समावेशन और सशक्तिकरण

  • जन धन–आधार–मोबाइल (जैम) त्रयी भारत की कल्याणकारी लाभ वितरण व्यवस्था की आधारशिला बन गई है।
  • प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) इसका पहला स्तंभ थी, जिसने करोड़ों वंचित नागरिकों को बैंकिंग सेवाओं तक पहुँच प्रदान की।
  • वित्तीय वर्ष 2024–25 में ही प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजनाओं के अंतर्गत ₹6.9 लाख करोड़ की राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित की गई।
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY): सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों को 57 करोड़ से अधिक जमानत-मुक्त ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। मुद्रा योजना के लाभार्थियों में लगभग दो-तिहाई हिस्सेदारी महिलाओं की है।

परिवहन और संपर्क-सुविधा

  • सड़क अवसंरचना: राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई लगभग 91,000 किलोमीटर से बढ़कर 1.46 लाख किलोमीटर से अधिक हो गई है।
  • अटल सुरंग, सुदर्शन सेतु तथा दिल्ली–देहरादून आर्थिक गलियारा जैसी परियोजनाओं ने क्षेत्रीय संपर्क-सुविधा में सुधार किया है।
  • रेलवे का आधुनिकीकरण: रेलवे विद्युतीकरण लगभग 20 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 100 प्रतिशत तक पहुँच गया है। वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों ने गति, आराम और दक्षता में सुधार किया है।
  • स्वदेशी कवच सुरक्षा प्रणाली ने यात्रियों की सुरक्षा को सुदृढ़ किया है तथा दुर्घटनाओं में कमी लाई है।
  • क्षेत्रीय वायु संपर्क: उड़ान योजना के अंतर्गत संचालित हवाई अड्डों की संख्या 74 से बढ़कर 165 हो गई है।
  • मेट्रो और तीव्र पारगमन प्रणालियाँ: मेट्रो रेल नेटवर्क 2014 में 248 किलोमीटर से बढ़कर 1,150 किलोमीटर से अधिक हो गया है।
  • नमो भारत क्षेत्रीय तीव्र पारगमन प्रणाली (RRTS ) ने उच्च गति वाली क्षेत्रीय संपर्क-सुविधा प्रदान की है।

शासन संबंधी सुधार

  • जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम ने अनेक केंद्रीय कानूनों के उपबंधों में संशोधन किया है, जिससे छोटे उल्लंघनों के लिए आपराधिक दंड के स्थान पर दीवानी उपचार की व्यवस्था की गई है।
  • केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS): यह मंत्रालयों, विभागों, राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के लिए उपलब्ध एक समर्पित प्रतिपुष्टि मंच है, जो शिकायतों के निस्तारण के संबंध में नागरिक संतुष्टि की निगरानी करता है।
  • पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान: यह पहल विभिन्न क्षेत्रों में एकीकृत अवसंरचना नियोजन को प्रोत्साहित करती है।
  • इससे परियोजनाओं में होने वाली देरी कम होती है तथा सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय में सुधार होता है।

चुनौतियाँ क्या हैं?

  • सार्वजनिक सेवाओं तथा अवसंरचना तक पहुँच में अभी भी महत्वपूर्ण क्षेत्रीय असमानताएँ विद्यमान हैं। राज्यों और जिलों के बीच सेवाओं की गुणवत्ता एक समान नहीं है।
  • संवेदनशील एवं वंचित वर्गों के बीच वित्तीय साक्षरता तथा डिजिटल साक्षरता का स्तर अभी भी अपर्याप्त है।
  • बढ़ती ऊर्जा मांग के कारण नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण तथा विद्युत ग्रिड अवसंरचना में अधिक निवेश की आवश्यकता है।
  • नव-निर्मित परिसंपत्तियों के रखरखाव तथा उनकी दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर ध्यान देना आवश्यक है।

निष्कर्ष

  • भारत में जीवन की सुगमता के क्षेत्र में हुआ परिवर्तन यह दर्शाता है कि लक्षित कल्याणकारी कार्यक्रम, अवसंरचना में निवेश, डिजिटल शासन तथा संस्थागत सुधार किस प्रकार करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
  • इन उपलब्धियों को बनाए रखते हुए उभरती चुनौतियों का समाधान करना वर्ष 2047 तक एक समावेशी, सुदृढ़ तथा समृद्ध विकसित भारत के निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

स्रोत: PIB

 

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